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Showing posts from February, 2017

ग्रामोदय मेले में रही 9.25 करोड़ के भैंसे की धूम, वहीं लोक कला ने भी ख़ूब रंग बिखेरा

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अन्तरिक्ष में इसरो की एक और अनूठी उड़ान

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एक नयी सुबह  एक नयी उड़ान  एक नया मुक़ाम  एक नया इतिहास 



        अपने हर मिशन में एक नया इतिहास रचने का दूसरा नाम भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन या कहें इसरो है। यह एक जुमला नहीं है। यह तो एक जीती-जागती मिशाल है। इसरो अपने 104 उपग्रहों के एकसाथ प्रक्षेपित करने के ऐतिहासिक मिशन पर है, और अगर सब कुछ बेहतर रहा तो निश्चित ही इसरो, अन्तरिक्ष विज्ञान की दुनिया में एक नया अध्याय जोड़ने  में  15 फ़रवरी की सुबह ज़रूर सफल रहेगा। इसरो के 104 उपग्रह एकसाथ पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने का यह मिशन अपने आप में एक अनूठा और साहसिक है साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की विदेश यात्राओं का कारगर परिणाम भी है। 104 उपग्रहों में मात्र तीन उपग्रह भारतीय हैं तथा 101 उपग्रह विदेशी है। इनमें 96 उपग्रह अमेरिका के हैं एवं एक-एक उपग्रह इजरायल, कजाखस्तान, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड और संयुक्त अरब अमीरात  के शामिल हैं। इसरो के इस अभियान के साथ ही भारत के कई अन्य उद्देश्यों की पूर्ति भी होती हुई साफ़ दिखाई देती है, वे यह कि इससे भारत के अन्तराष्ट्रीय मैत्री सम्बन्ध और भी प्रगाढ़ होगे और विदेशी उपग्रहों के प…

हिन्दी भाषा को विश्व में सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भाषा के खिताब से नवाज़ा गया

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बीती 10 जनवरी को समूचे विश्व में विश्व हिंदी दिवस बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यह तारीख हिन्दी के लिये अपने बढ़ते प्रभाव से दुनिया को रूबरू कराने की भी रही।


    उल्लेखनीय है कि हिन्दी को विश्व में सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भाषा के खिताब से नवाज़ा गया है। साथ ही आकड़ों से ज्ञातव्य होता है कि भारत में हिन्दी भाषी 78 फ़ीसद हैं। इसके चलते अब सरकार को  संविधान संशोधन के द्वारा उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की भाषा हिन्दी करनी चाहिए।  साथ ही संसद और विधान मण्डलों से पारित कानून की भाषा भी हिन्दी पर होने का प्रावधान करना चाहिए। इसका परिणाम यह होगा कि हिन्दी भाषा लोकप्रिय बनेगी और साथ ही भारत राष्ट्र हिन्दी भाषी राष्ट्र भी बनेगा।  

लोकतंत्र का महापर्व

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भारत के पाँच राज्यों  उत्तराखंड,  उत्तर प्रदेश,  गोवा,  मणिपुर  और  पंजाब  में आगामी दिनों विभिन्न चरणों में लोकतंत्र का महापर्व मनाया जायेगा। इस पर्व की तैयारी प्रशासन के द्वारा युद्ध स्तर पर ज़ारी है। साथ ही लोकतंत्र के इस महापर्व में राज्य के निवासियों द्वारा अपने मताधिकार का प्रयोग देश हित में करने के लिये उत्साह,  मतदान जागरूकता कार्यक्रमों में साफ़ नज़र आ रहा है। भारत निर्वाचन आयोग तथा  प्रशासन तंत्र  विधानसभा चुनाव में मुकम्मल जनता की  भागीदारी के लिये रोज़ाना नये-नये तरीकों के द्वारा लोगों में चुनाव तथा मतदान के प्रति जागरूकता अभियान चलाये जा रहे है।



          क्या ये सभी अनुप्रयोग कारगर साबित हो रहे है ? क्या ग्रामीण जनता मतदान की अहमियत समझ रही है ? क्या उन्हें अपने वोट का उद्देश्य मालूम है ? क्या जनता अपने क्षेत्र के उम्मीदवार की फ़ितरत से वाकिफ़ है ? इन सवालों  के सम्बन्ध में भी प्रशासन के द्वारा जागरूकता अभियान चलाने की पूर्ण जोर आवश्यकता है।

        आज़ादी के 7 दशक होने को हैं,  परन्तु देश की सामाजिक परिस्थितियाँ औपनिवेशिक काल से भी ज्यादा बदहवास और बदहाल हो गयी है। अंग्रेज़ो…