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Showing posts from June, 2017

शैल चित्र : कहीं सुलझी तो कहीं अनसुलझी पहेली

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बचपन में जब कभी हम इतिहास को जानने और समझने के लिए किताबों का सहारा लेते थे, तब हमें अपने पूर्वजों के संबंध में एक अनूठी जानकारी हमारे हाथ लगती थी, वो ये कि..... हमारे पूर्वजों को शैल चित्र गढ़नेमें महारथ हासिल था। 

लेकिन उस उम्र के पड़ाव में हमारे लिए यह कल्पना करना या उसके बारे मे सोचना हमारी समझ के परे होता था। यह कहना ग़लत नहीं होगा कि,‘इंसान वहीं तक कल्पना और सोच सकता है जहां तक उसने दुनिया देख रखी है , उससे परे संभव नहीं।’

हम पढ़ते थे कि हमारे पूर्वज जिन गुफाओं में रहते थे उन गुफाओं कि भित्ति पर; साथ ही बड़ी चट्टानों पर चित्र या कोई संकेत अपने मनोरंजन या आपसी संवाद के लिये बड़ी शिद्दत के साथ उकेरते थे.... आज हम इन चित्रों को शैल चित्र से संबोधित करते हैं। 




    हम अगर इन शैल चित्रों को पुरातत्त्ववेता की निगाहों से परखे तो, यह तथ्य सामने आते हैं कि, यह चित्र अपने आप में कई गूढ़ रहस्यों और दास्ताओं को अपने में समाये हुए ... हमारे सम्मुख एक पहेली की तरह प्रस्तुत है। और यह पहेली कभी कभी अनसुलझी भी रह जाती हैं।

समय बीता.... फिर नयी पीढ़ी ने पुरानी सभ्यता को जिंदा रखने के लिये उन शैल चित्…

मंज़र ऐसे जो आँख के रास्ते होते हुये दिल और दिमाग़ पर दस्तक दें

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आप सभी ने बोलती हुई फ़ोटो ज़रूर देखी होगी... साथ ही ऐसी फ़ोटो भी देखी होगी...... जो आँख के रास्ते होते हुये दिल और दिमाग़ पर दस्तक दे जाती  है। 


सैरनामा ब्लॉग की इस कड़ी में,मैं प्रशांत शाह वेला आपको इस फ़ोटो ब्लॉग के माध्यम से कुछ ऐसी चुनिन्दा, दिलचस्प और लाजवाब मंज़रों से आपको रूबरू करने जा रहा हूँ जो मैंने सफ़र के दौरान अपने कैमरे के फ्रेम में कैद किये हैं... यह फ़ोटो न केवल आपको सोचने के लिये मज़बूर करेंगी अपितु कहीं कहीं आपको क़ुदरती फ़न का अहसास भी करेंगी....








बहरहाल ये मंज़र कोई नये नहीं... आपने अपनी आँखों से कभी न कभी इन मंज़रों को ज़रूर कैद किये होगा... हाँ ये बात और है कि कभी आपने गौर फ़रमाया होगा तो कभी नहीं ।
!! शुक्रिया भारत !!