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भारतीयता पर फ़ख्र

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            नयी उमंग और नये जोश के साथ आये इस स्वाधीनता दिवस का  समूचा भारत वर्ष अपनी बांहों को फैला कर इसका स्वागत करने के लिए तैयार है । हमारे पिछले अनुभव हमें यह अहसास दिलाते हैं कि भारत ने स्वाधीनता के बाद विश्व के अन्य विकासशील देशों के मुकाबले जिस  गंभीरता के साथ अपनी स्थिति में परिवर्तन किया है वो भारत पर फ़ख्र महसूस करने के लिए काफ़ी है । परिवर्तित परिस्थितियों के  सकारात्मक परिणाम आज बेहतर एवं अद्वितीय कीर्तिमान के रूप में सामने आ रहे हैं ।      भारत ने स्वाधीनता प्राप्ति के बाद विभिन्न पिछड़े सामाजिक,  आर्थिक,  राजनैतिक, एवं शैक्षिक क्षेत्रों की प्रगति के लिए प्रभावी  राष्ट्रीय नीतियों का निर्माण किया । तदोपरान्त आने वाली सरकारों ने सकारात्मक राजनीति का परिचय देते हुए इन राष्ट्रीय नीतियों की समीक्षा की तथा नई राष्ट्रीय नीतियों को देश हित के लिए लागू किया। परिणामस्वरूप आज भारत की स्थिति बेहतर हुई है और  साथ ही वैश्विक स्तर पर भारत ने अपने नाम को स्थापित करने में  भी सफल रहा है । इन सब क...

बजट से जुड़ी आमजन की उम्मीद

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          1 फ़रवरी को संसद की पटल पर पेश होने वाले आम बजट पर पूरे भारत की निगाहें टिकी  हुई है । इसके बाबत  समाज का हर एक तबका अपनी अपनी क्षमता के अनुसार कयास लगाने पर जुटा हुआ है । तो वहीं  सरकार भावी भारत के विकास की कहानी को गढ़ने में मशरूफ है ।      वैसे सरकार की हरेक नीति समाज के सभी वर्गों को प्रभावित करने वाली होती है ।  किन्तु  जब बात आम बजट की  हो तो समाज के अन्तिम पायदान के आमजन अत्यधिक प्रभावित होते हैं । क्योंकि बजट पर आधारित उन सभी का रोज़मर्रा का जीवन होता है और इससे उनका जीवन बेहद प्रभावित होता है ।   बजट निर्माण को लेकर सरकार के सामने अनेक चुनौतियां हैं  । जहाँ एक ओर वह आमजन की उम्मीदों पर खरा उतरना चाहेगी वहीं दूसरी ओर नोटबंदी और जीएसटी से हुये आर्थिक क्षति की भरपाई भी करना चाहेगी और साथ ही आर्थिक विकास दर को नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाने का मुख्य ध्येय राजधानी सरकार का होगा । 

गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी का यादगार ऐतिहासिक दिन

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रानी लक्ष्मी बाई के झाँसी स्थित क़िले की बुर्ज़ पर लहराता तिरंगा                                 गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी का यादगार ऐतिहासिक दिन...           यह दिवस हर भारतीय के जीवन में नया उत्साह और नयी उम्मीद के साथ आता है। इस राष्ट्रीय और लोकतांत्रिक  पर्व के अवसर पर हर वर्ष  दिल्ली के राजपथ पर  होने वाला साहसिक एवं अद्भुत  प्रदर्शन भारतीयों और विदेश से आये हुए मुख्य अतिथियों को भारत वर्ष के शौर्य, पराक्रम और उसकी विविधता में  एकता की संस्कृति  से रूबरू होने का भी सुअवसर प्रदान करता है। मुकम्मल भारत वर्ष इस प्रदर्शन को देख खुद को गौरवान्वित महसूस करता है, साथ ही भारतीय होने पर उसको नाज़ भी होता है।               उल्लेखनीय है, आज से 68 साल पहले आज ही के दिन से,  भारत के संविधान ने अपने संप्रभुता के सफ़र की शुरुआत की थी। यह संविधान हमारे पुरखों के संघर्ष और उनकी उपलब्धि के फलस...

अतिरंजीखेड़ा के विस्तृत भू-भाग में फ़ैले पुरातात्विक अवशेष ईंट और टेरकोटा के टुकड़े गवाह हैं अपने इतिहास और रंज के

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   अतिरंजीखेड़ा , उत्तर प्रदेश के एटा ज़िले से 16 किमी • की दूरी पर मरथर – मिरहची मार्ग पर   स्थित एक   प्रागैतिहासिक , ऐतिहासिक   एवं   पुरातात्विक स्थल है। गंगा की सहायक , काली नदी ( कालिंदी नदी ) के तट पर स्थित यह पुरातात्विक स्थल अब मात्र एक बीरान क्षेत्र ही रह गया है।  काली नदी  (कालिंदी नदी) का विहंगम नज़ारा         प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग बौद्ध स्थलों के साक्ष्यों को खोजते हुए सन् 630 ईसवी को यहाँ पहुँचा था । इतिहासकारों की माने तो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के जनक सर अलेक्जेण्डर कनिंघम ने सन् 1865 ईसवी में इस स्थल को पहली दफ़ा देखा था।   Terracotta        196 2 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने यहाँ उत्खनन कराया। इसमें यहाँ से लोहा पिघलाने की भट्ठियां , तांबे के बर्तन और मुद्रा , भाला , गेरुआ रंग के बर्तन मिले। यही नहीं कुषाण , गुप्त कालीन मूर्तियां , तांबे के सिक्के , पत्थर के टैग , देवी - देवताओं के चित्र , फूल - पत्तियां , भाले एवं ई...