अबला से सबला तक का सफ़र वही तय कर सका जिसने अपना रास्ता ख़ुद बनाया
महिला सशक्तिकरण के अभियान लम्बे अर से से निरंतर सफलता की राह पर बढ़ते हुये नित नये आयामों को हासिल कर रहे हैं। और इसी क्रम में इस अभियान का एक अभिन्न अंग विश्व अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है। हर विशेष दिन लोगों में नवीन ऊर्जा और नये संकल्पों को जन्म देता है। इसी को आधार मानते हुये अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन 8 मार्च को समूचे विश्व भर में किया जाता है। ग़ौर करें तो यह दिवस हमारे समाज से सीधा संबंध रखता है। सीधा संबंध होने के नाते हर मनुष्य अपनी रोज़ मर्रा की ज़िंदगी में किसी न किसी रूप में महिला से रोज़ाना ज़रूर प्रभावित होता है। तो क्या महिला दिवस का अस्तित्व सिर्फ़ एक दिन का ही होना चाहिए ? नहीं ! ये दिवस तो हर दिन मनाया जाना चाहिये , इनके अस्तित्व से ही दुनिया का अस्तित्व क़ायम है। आज महिलायेँ अपना रास्ता ख़ुद ही अख़्तियार कर रही हैं। बस उनकी ऊंची उड़ानों को पंख देने की आवश्यकता है। दुनिया भर में अपने मुक़ाम को हासिल करने वाली महिलाओं के प्रेरक अफ़सानो की लंबी फेहरिस्त है। अगर बात करें भारत की तो , हा...